30 फीसदी बैंक कर्मचारियों की नौकरी खतरे में

टेक्नोलॉजी एडवांसमेंट का खतरा अब सिर्फ आईटी सेक्टर पर नहीं बल्कि बैंकिंग सेक्टर पर भी मंडराने लगा है. सिटीग्रुप इंक के पूर्व सीईओ विक्रम पंडित का मानना है कि प्रौद्योगिकी क्षेत्र में हो रहे विकास से अगले 5 सालों में 30फीसदी   बैंकिंग जॉब्स खत्म हो जाएंगी.

आर्टिफि‍सियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स के आने से कम हुई जॉब्स 
एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि अगले कुछ सालों में आर्टिफि‍सियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स के आने से बैंकों में कर्मचारियों की जरूरत कम हो जाएगी. इसकी शुरुआत हम अभी से देख पा रहे हैं, क्योंकि अब लोग बैंक ना जाकर इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग सेवा का प्रयोग करने लगे हैं.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दुनिया की सबसे बड़ी फर्म वॉल स्ट्रीट भी मशीन संचालन और क्लाउड कंप्यूटिंग सहित नए प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर रही हैं, ताकि वे अपने संचालन को स्वचालित कर सकें, इससे मैन पॉवर की डिमांड घट रही है और एम्प्लाई को नई जॉब खोजने के लिए जद्दोजहद करनी पढ़ रही है.

खुदरा बैंकिंग में ऑटोमेशन के आने से 30% लोगों की डिमांड घटी 
मार्च 2016 की एक रिपोर्ट के अनुसार खुदरा बैंकिंग में ऑटोमेशन के आने से 2015 और 2025 के बीच में 30% लोगों की डिमांड कम हुई है, जिसके चलते अमेरिका में कुल 770,000 लोगों को पूर्णकालिक नौकरी छोड़नी पड़ी और यूरोप में लगभग 10 लाख लोगों की नौकरी चली गई.

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