आज विराजेंगे विघ्नहर्ता गणेश, पंडाल रंग बिरंगी रोशनी के साथ तैयार

गणेश चतुर्थी पर शुक्रवार को पंडालों व घरों में विघ्नहर्ता विराजेंगे। पंडाल रंग-बिरंगी रोशनी व आकर्षक सजावट के साथ तैयार हैं। प्रतिमाएं भी पहुंचने लगी हैं, जो शुक्रवार की शाम तक जारी रहेगा। शुभ मुहूर्त में स्थापना होगी। इसके साथ ही गणेशोत्सव की धूम शुरू हो जाएगी।

शुक्रवार को अमृत व शुभ संयोग में प्रतिमा स्थापना के साथ ही उत्सव की भी शुरुआत हो जाएगी। प्रमुख चौक-चौराहों पर व गलियों की सार्वजनिक जगहों के साथ ही घरों में भी भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित होंगी।

सुबह 8.30 से रात 8.30 तक भद्रा, स्थापना को लेकर असमंजस

गणपति की स्थापना अमृत व शुभ योग में होगी। इसके साथ ही भद्रा का भी ग्रहण रहेगा। इसकी अवधि सुबह 8.30 से लेकर रात्रि 8.30 बजे तक रहेगी। गोंड़पारा सीताराम मंदिर के महंत ने बताया कि इस वजह से प्रतिमा स्थापना भी वर्जित रहेगी।

उन्होंने बताया कि प्रतिमा स्थापना में भद्रा व शुभ मुहूर्त मान्य होता है। लिहाजा इस बीच प्रतिमा की स्थापना नहीं हो सकेगी। गणपति स्थापना में मुहूर्त दोष नहीं लगता। इस वजह से किसी भी समय स्थापना की जा सकती है।

ऐसे करें स्थापना

 स्थापना स्थल को पहले गोमय व जल से स्वच्छ कर स्वास्तिक व अष्टदल कमल बनाकर लाल वस्त्र से आसन बिछाना चाहिए। इसके बाद प्रतिमा की स्थापना कर नवग्रह, मंगल कलश हल्दी के गौरी-गणेश की भी मंत्रोच्चार के साथ स्थापना करनी चाहिए।

गणेशोत्सव में चतुर्थी को स्थापना के 11 दिन बाद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को विसर्जन करने का विधान है। भगवान को दूर्वा और मोदक अर्पित करना चाहिए। इससे उनकी कृपा मिलती है।

11 दिनों का रहेगा पर्व

इस बार गणेशोत्सव 10 दिनों के बजाय 11 दिनों का रहेगा। दैवज्ञ डॉ.राजेश कुमार ज्योतिष मार्तण्ड ने बताया कि 31 अगस्त व 1 सितंबर को दो दिन दशमी तिथि पड़ने से ये स्थिति बन रही है। इससे पर्व 25 अगस्त से लेकर 5 सितंबर तक मनाया जाएगा।

उनका यह भी कहना है कि भद्रा सिर्फ होलिका दहन और रक्षाबंधन में ही मान्य होती है। वहीं गणेश स्थापना में भद्रा दोष नहीं लगता। गणेश स्थापना स्थिर लग्न में सुबह 5.29 से 7.41 तक और दोपहर में 12.7 से 2.24 तक किया जा सकेगा।

शाम को 6.16 से 7.49 और रात्रि 10.56 से 12.45 तक मुहूर्त है। इसके साथ ही चौघड़िया मुहूर्त में सुबह 6 से 10.30 तक चर,लाभ और अमृत योग दोपहर 12 से 1.30 तक शुभ, शाम को 4.30 से 6 तक चर और रात्रि 9 से 10.30 तक लाभ योग रहेगा।

चंद्र दर्शन है वर्जित

गणेश चतुर्थी को कलंक चतुर्थी भी कहते हैं। इस दिन चंद्र दर्शन वर्जित माना गया है। चंद्र दर्शन करने से कलंक लगता है।  भगवान गणेश को देखकर चंद्रदेव ने उपहास किया था। इससे नाराज होकर भगवान गणेश ने चंद्र को श्राप दिया था।

पंडालों में पहुंचने लगी प्रतिमा

पूजा पंडालों में प्रतिमा पहुंचने लगी हैं। बैंडबाजे के साथ पंडालों में युवकों की टोलियां गाड़ियों में उन्हें लेकर जा रही हैं। इससे देर रात तक बैंडबाजे से गणेशोत्सव की धूम देखते ही बन रही थी।

कागज के 70 फीट गणपति होंगे विराजित

गौरी गणेश समिति की ओर से व्यापार विहार में कागज के बनी 70 फीट ऊंची गणपति की प्रतिमा विराजित की जा रही है। इससे लोगों को विशाल गणपति के साथ ही ईको फ्रैंडली प्रतिमा के दर्शन होंगे। साथ ही श्रद्घालु प्रतिमा को स्पर्श कर आशीष ले सकेंगे।

उन्हें रिद्घि-सिद्घि और शुभ-लाभ के भी दर्शन होंगे। मेले जैसे माहौल रहेगा। नए-नए झूलों के साथ ही 50 फीट लंबा और 50 फीट चौड़ा तालाब बच्चों के नौका विहार के लिए बनवाया गया है। पंडाल में शुक्रवार की रात 9 से 10 बजे के बीच स्थापना होगी।

महल में लालबाग का राजा

हरदेव लाल मंदिर में महल सज रहा है जहां लालबाग के राजा के रूप में भगवान गणेश विराजित होंगे। इसमें 35 फीट ऊंची प्रतिमा के साथ ही उनके दरबार का आकार भी बड़ा है। समिति की ओर महल को भव्य बनाया जा रहा है। इसके साथ ही दयालबंद में भी भगवान के दरबार के लिए मंदिर और महल बनाया जा रहा है।

मोतियों से सजे गणपति

सफेद मोतियों से सजी आकर्षक गणपति प्रतिमा की स्थापना टिकरापारा स्थित डॉ.घोष गली में होगी। इससे श्रद्घालुओं को भगवान के सौम्य रूप में दर्शन होंगे। मूर्तिकार सुजीत सरकार ने बताया कि मोतियों से प्रतिमा और श्रृंगार सुनहरी आभा लिए आभूषणों से होगा।

मटर, मुंगफली और दाल से श्रृंगार

तोरवा बस्ती में मुंगफली, मटर के दाने और अरहर दाल से बनी प्रतिमा आकर्षण का केंद्र रहेगी। उनका श्रृंगार और वस्त्र मसूर दाल, मुंगफली, मटर और राजमा से किया गया है। मूर्तिकार सुजीत सरकार ने बताया कि भगवान की विशाल प्रतिमा मयूर में विराजी है।

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