कभी 5 रुपए के लिए की मजदूरी, आज 32 करोड़ की कंपनी की CEO

मेरी कहानी बेहद लंबी और पेनफुल है, लेकिन मैंने समझा कि दर्द ने मुझे हर बार कुछ नया सिखाया है. कभी भी लाइफ में मैंने काम्प्रोमाइज नहीं किया और यदि मैं इसे ही अपना भाग्य समझ लेती, तो आज खेतों में मजदूरी कर रही होती. सोमवार को फिक्की फ्लो की ओर से आयोजित सेशन ‘लाइफ स्टोरी में इसी तरह यूएसए की एंटरप्रेन्योर डॉ. ज्योति रेड्डी ने अपनी स्टोरी सुनाई.

ज्योति की कहानी उन्हीं की जुबानी

हम पांच भाई-बहन थे. हमारी फैमिली की फाइनेंशियल सिचुएशन बहुत खराब थी. एक ही कमरे में एक ही चादर पर हम भाई-बहन और पापा-मम्मी सोते थे. हालात ये थे कि अकसर बिना खाये सोना पड़ता था. मां हमें देखकर रातभर रोती. तब मेरे पापा ने मुझे और बहन को गांव के पास अनाथाश्रम में छोड़ दिया. ये हमारी इंडियन सोसाइटी की मेंटेलिटी है कि बेटों को पास रखो और बेटियों को घर से निकाल दो. उस अनाथाश्रम में 60 बच्चे रहते थे.

वहां मेरी बहन की डेथ हो गई. वहां के बच्चों को 14 नवंबर का इंतजार होता था. क्योंकि एक मिमिक्री आर्टिस्ट उस दिन अपने जन्मदिन पर वहां कंबल और चॉकलेट बांटने आते थे. संघर्ष के बीच मैंने अपनी स्टडी जारी रखी. मुझे कलाम साहब की बात हमेशा याद रहती है कि लास्ट बैंचर भी ब्रिलियंट होता है और मैं लास्ट बैंचर ही थी.

मेरे दर्द ने ही मुझे सफल बनाया। 16 की उम्र में शादी और 18 साल आते-आते दो बेटियां मेरी गोद में थीं. फैमिली को चलाने के लिए पैसे नहीं थे. बेटियों की परवरिश के लिए नेहरू युवा केन्द्र में वॉलेंटियर के तौर पर काम किया. जिंदगी टीचर बनकर जो सिखाती है वो कोई नहीं सिखा सकता.

32 करोड़ की कंपनी की सीईओ

एक कजिन यूएसए में पिछले कई सालों से रहती थी, उससे यूएसए जाने में मदद की. वहां कैसेट सेल्स गल्र्स की नौकरी जॉइन कर ली. वहां एक व्यक्ति आया, जिसने मुझे सॉफ्टवेयर रिक्रूटर्स की जॉब ऑफर की. मैंने कहा कि मुझे इस फील्ड की कोई नॉलेज नहीं है, तब उसने कहा कि आप क्विक लर्नर हो.

मैंने जॉब एक्सेप्ट कर ली, जिसके बाद इसी फील्ड की दूसरी जॉब मिली। 2002 में खुद की कंपनी स्टार्ट करने का फैसला लिया. मेरी इंग्लिश अच्छी नहीं थी, इसके लिए मैंने बाइबल पढऩा शुरू किया. लाइफ का एक खास एक्सपीरियंस यह भी है कि एक समय जिस यूनिवर्सिटी में मैंने टीचर के लिए अप्लाई किया और वहां इंग्लिश ना आने के कारण रिजेक्ट कर दिया गया.

कुछ सालों बाद वहां से कॉल आया, उन्होंने कहा हम आपकी लाइफ के पार्ट और आपकी बुक ‘यट आई एम नोट डिफिटेड को अपने यहां कोर्स करिकुलम में शामिल करना चाहते हैं.

बता दें कि एक वक्त ऐसा था कि ज्योति ने 5 रुपए के लिए मजदूरी भी की. जिसके बाद उन्होंने 398 रुपए के लिए स्कूल में पढ़ाया. आज वे जिस कंपनी की सीईओ हैं उसका टर्नओवर 5 मिलियन डॉलर करीब 32 करोड़ रुपए है. इसके साथ उन्होंने ह्ययूमैनिटी में डॉक्टरेट की डिग्री भी ली है.

 

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